संकुल अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन तिलहन के अंतर्गत सोयाबीन फसलों मे कीट व्याधि की रोकथाम हेतु ग्राम चौकीगवां एवं कोठरा मे कीट प्रबंधन वैज्ञानिक ब्रजेश नामदेव ने किसान बंधुओ को
सोयाबीन में तना मक्खी का प्रकोप रोकने के उपाय बताते हुए कहाँ की जैविक नियंत्रण के माध्यम से ट्राईको कार्ड, ट्राइकोडर्मा, बैसिलस थुरिंजिनेसिस, और अन्य जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें, एवं रासायनिक नियंत्रण हेतु अगर प्रकोप अधिक हो, तो इमिडाक्लोप्रिड, क्लोरोपायरीफॉस या अन्य कीटनाशकों का सीमित मात्रा में छिड़काव करें।
चूसक कीट के नियंत्रण हेतु सर्वप्रथम पौधों की पत्तियों के नीचे और ऊपर की सतह पर कीटों की जांच करें। उसके बाद
जैविक नियंत्रण के अंतर्गत नीम का तेल (5%) या साबुन के पानी का छिड़काव करें।
रासायनिक नियंत्रण नियंत्रण हेतु एसिटामिप्रिड या थायमेथोक्साम का छिड़काव करें।
रोग प्रबंधन प्रबंधन के अंतर्गत पत्तियों का धब्बा रोग प्रबंधन हेतु रोगग्रस्त पत्तियों और पौधों को हटा दें। रासायनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्बेंडाजिम या क्लोरोथेलोनिल का छिड़काव करें
फसल की नियमित निगरानी सतत करते रहे और समस्या की प्रारंभिक पहचान कर समाधान करें।

साथ ही केंद्र के प्रभारी डॉ. संजीव कुमार गर्ग ने किसान बंधुओ को सम्बोधित करते हुए कहाँ की भारत सरकार तिलहन (ऑयलसीड्स) को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिससे भारत खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता बन सके। भारत खाद्य तेलों का बड़ा आयातक है। तिलहन उत्पादन बढ़ाकर, देश में खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।
तिलहन उत्पादन में वृद्धि से खाद्य तेलों के आयात में कमी आएगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। तिलहन की फसलें किसानों को बेहतर मूल्य प्रदान कर सकती हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।
स्वदेशी तिलहन से उत्पादित तेल अधिक स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। इनके बढ़ते उत्पादन से लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाले खाद्य तेल मिल सकते हैं।
इन सब कारणों से, भारत सरकार तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम चला रही है, जैसे कि राष्ट्रीय तिलहन मिशन, जिसके तहत किसानों को तकनीकी और आदान सामग्री प्रदान की जाती है।
साथ ही किसानो को कृषि विज्ञान केंद्र की कार्य प्रणाली को विस्तार से बताते हुए कहाँ की
किसानों को नई कृषि तकनीकों, उपकरणों और वैज्ञानिक विधियों का प्रशिक्षण और प्रदर्शन करना।
नई किस्मों और प्रौद्योगिकियों का परीक्षण करके उनके प्रभाव का अध्ययन करना और किसानों के लिए उपयुक्त विकल्प प्रदान करना।
मिट्टी की गुणवत्ता का परीक्षण कर किसानों को सुधार के सुझाव देना।
कृषि से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी परामर्श प्रदान करना।कृषि संबंधी ज्ञान और जानकारी को व्यापक स्तर पर फैलाना।
इन गतिविधियों के माध्यम से KVK किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद करते हैं और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान करते हैं।
अंत मे चयनित किसान भाइयों को सोयाबीन फसल हेतु आदान सामग्री एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया गया। साथ ही साथ डॉ. गर्ग जी द्वारा मृदा कार्ड का उपयोग कैसे करें विस्तार से बताया गया। आज के कार्यक्रम मे 45 किसान बंधु शामिल हुए।
अंत मे ग्राम धमानिया (आदर्श तिलहन ग्राम ) मे किसान बंधुओ से कीट प्रबंधन विषय पर चर्चा की गई। ट्राईको कार्ड का उपयोग कैसे करें प्रयोगिक तोर पर सिखाया गया। इस अवसर पर 31 किसान भाई उपस्थित रहे।






