केसला में मनाया गया तिलहन आदर्श ग्राम परियोजना के अंतर्गत तिल फसल का प्रक्षेत्र दिवस

ग्राम झुनकर मे प्रक्षेत्र दिवस मनाया गया,    मनाया गया इस दौरान तिलहन आदर्श ग्राम के प्रभारी डॉ. गर्ग ने तिल के उत्पादन पर समीक्षा की गई एवं उसे भंडारीत करने की विधि को किसान बंधुओ को बताया गया। आने बाले समय मे सरसो की खेती हेतु किसानो को मार्गदर्शन देते हुए कहाँ की
आगामी रबी सीजन में सरसों और तिल की खेती किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण फसल साबित हो सकती है। किसानों को इस दिशा में सही तरीके से मार्गदर्शन मिलना बेहद आवश्यक है।
सरसों की अच्छी फसल के लिए उचित बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। प्रमाणित और स्वस्थ बीज का उपयोग करें। प्रति हेक्टेयर 3-4 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
फसल रोगों से बचाव के लिए बीजों को बुवाई से पहले जैविक या रासायनिक दवाओं से उपचारित करें।


सरसों की फसल को सही पोषण के लिए 80 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फास्फोरस, और 40 किलो पोटाश की आवश्यकता होती है। खाद का उपयोग मिट्टी परीक्षण के अनुसार करना चाहिए, और जैविक खाद का उपयोग भी लाभकारी हो सकता है। सरसों की फसल के लिए पानी का प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है। सरसों को सामान्यतः कम पानी की जरूरत होती है,
बुवाई के 3-4 सप्ताह बाद। फूल आने और फली बनने के दौरान। पानी अधिक न दें क्योंकि इससे पौधे में रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है


तिल की खेती एक कम लागत और उच्च मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है।
ग्राम कोटमी माल मे संकुल अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन  तिलहन के अंतर्गत तिल का प्रक्षेत्र दिवस मनाया गया

साथ ही कीट वैज्ञानिक ब्रजेश कुमार नामदेव ने सरसों फसल बीज में बीजउपचार की बिधि को विस्तार पूर्वक बताया

Rahul Majhi
Author: Rahul Majhi

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