प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के निधन पर शोक व्यक्त किया।
न्यूज़ राष्ट्रीय जागरण
Posted On: 08 AUG 2024 1:45PM by PIB Delhi
श्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया:
“पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के निधन से व्यथित हूं। वे एक राजनीतिक दिग्गज थे जिन्होंने प्रतिबद्धता के साथ राज्य की सेवा की। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। ओम शांति।”
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के निधन के साथ वामपंथी राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया.
बीते कुछ समय से बीमार चल रहे भट्टाचार्य 80 साल के थे और उनका निधन आठ अगस्त को बालीगंज स्थित उनके पाम एवेन्आवास पर हुआ।
उनकी पार्टी के कुछ कॉमरेड उन्हें मार्क्सवादी कम, बंगाली ज़्यादा मानते थे. उनके पहनावे और बातचीत के सलीके के चलते कुछ दूसरे कॉमरेड उन्हें भद्रलोक कहा करते थे। आर्थिक उदारवाद लागू करने और पूंजीवाद के साथ तालमेल बिठाने के चलते कुछ कॉमरेड उन्हें ‘बंगाली गोर्बाचोव’ भी कहते थे।
पहले ज्योति बसु की कैबिनेट में अहम मंत्री और बाद में 2000 से लेकर 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर, ऐसे शख़्स के तौर पर लोग देखता रहे जिन्हें दिन भर की कामकाजी व्यस्तता के बाद यूरोपीय फ़िल्मकारों की बेहतरीन फ़िल्में देखना पसंद था। भट्टाचार्य जी की दिलचस्पी का दायरा राजनीति से इतर साहित्य, थिएटर, सिनेमा और संगीत तक फैला हुआ था। वे घंटों टैगोर की कविताओं को सुना सकते थे और पाब्लो नेरूदा की कविताओं का ज़िक्र कर सकते थे।
निधन पर राजनीतिक जगत में शोक की लहर
उनके निधन की सूचना सामने आते ही राजनीतिक जगत में शोक की लहर छा गई है। वरिष्ठ भाजपा नेता और बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए एक्स पर लिखा, ‘मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का निधन हो गया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले।
स्कॉलर, पुजारी और एक लेखक की कहानी
बुद्धदेव भट्टाचार्य का जन्म 1 मार्च 1944 को उत्तरी कोलकाता में हुआ था। बंगाली ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाले बुद्धदेव भट्टाचार्य संस्कृत स्कॉलर, पुजारी और लेखक थे। उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से बंगाली साहित्य में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद वो सरकारी स्कूल में शिक्षक बन गए थे।
जब ठुकराया था पद्म भूषण का सम्मान
साल 2022 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने पुरस्कार ठुकराते हुए कहा था,”पद्मभूषण पुरस्कार के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मुझे किसी ने इस बारे में पहले नहीं बताया है। अगर मुझे पद्मभूषण पुरस्कार देने का एलान किया गया है तो मैं इसे लेने से इनकार करता हूं।” पुरस्कार ठुकराए जाने पर सीपीआई (एम) ने दलील थी कि हमारी पार्टी का काम आम लोगों के लिए है, अवॉर्ड के लिए नहीं।
उन्होंने साल 1966 में सीपीआई (एम) की सदस्यता ली थी।
इसके बाद 1968 में वो डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन की पश्चिम बंगाल राज्य समिति के सचिव बने।
1977 से लेकर 1982 तो वो काशीपुर-बेलगछिया विधानसभ क्षेत्र से विधायक रहे। 1987 में वो जादवपुर से विधायक बने। साल 2011 तक वो इसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। 6 नवंबर 2000 में वो बंगाल के मुख्यमंत्री बने थे। 13 मई 2011 तक वो सीएम बने रहे। 2015 में उन्होंने सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति से इस्तीफा दिया।





