महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान में व्यापक भ्रष्टाचार एवं परीक्षा प्रवेश नीति में मनमानी, लगभग 10 हजार छात्रों का भविष्य अंधकार में!

राष्ट्रीय न्यूज़ जागरण

तिथि-15 अप्रैल 2025

भोपाल

उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तथा रीवा सांसद जनार्दन मिश्र, मऊगंज मध्य क्षेत्र विधायक प्रदीप पटेल ने इस विषय को गंभीरता से विचार करने हेतु स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को पत्र द्वारा आग्रह किये जाने पर भी कोई सार्थक निर्णय नहीं निकला।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत अन्य संपूर्ण भारत के बोर्डों से 9वीं कक्षा पास करने वाले विद्यार्थी संस्कृत बोर्ड में कक्षा 10वीं में प्रवेश पाने के लिए पात्र हैं। वैसे ही 11 वीं कक्षा पास करने वाले अन्य बोर्ड के विद्यार्थी 12वीं में प्रवेश पाने के हकदर होते हैं। केवल उन्हें अतिरिक्त विषय के रूप में संस्कृत बोर्ड में संस्कृत विषय लेना अनिवार्य होता है। किसी बोर्ड का कार्यक्षेत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा-निर्देशों को संपूर्ण भारत के सभी राज्यों को शिक्षा प्रदान करना एवं प्रवेश प्रक्रिया को संचालित करना परन्तु राष्ट्रीय शिक्षा नीति को दरकिनरार करके अपनी मनमर्जी से प्रवेश नीति बनाकर लगभग 150 संस्थान में 10 हजार से अधिक बच्चों का भविष्य दाव पर लगाया जा रहा है। जिससे छात्रों के साथ शासन का लाखों रूपये का राजस्व का नुकसान हो रहा है। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान में 9 वर्षों से पदस्थ निर्देशक प्रभातराज तिवारी जिनका मूल पद लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल में है, के द्वारा मनमानी तरीके से अपनी मर्जी अनुसार महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान की प्रवेश नीति तैयार कराया गया है जो भी छात्र 9वीं तथा 11 वीं की परीक्षा केवल महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान से पास करेगा वो ही छात्र को महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान में क्रमशः 10वीं तथा 12वीं में प्रवेश मिल सकेगा जो कि सरासर गलत एवं अन्यायपूर्ण है।

यह कि प्रभातराज तिवारी महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान में निर्देशक के पद पर एवं संचालक म.प्र. राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड भोपाल में कार्यरत् हैं, दोनों बोडौँ के संचालन एक ही व्यक्ति/अधिकारी के द्वारा किया जा रहा है। क्या म.प्र.शासन स्कूल शिक्षा विभाग में प्रभातराज तिवारी से योग्य अधिकारी नहीं हैं। जबकि शासन के नियमानुसार संबंधित अधिकारी को अपने मूल पद एवं विभाग में जाना अनिवार्य होता है। विश्वस्त सूत्र से मिली जानकारी अनुसार प्रभात राज तिवारी अपने तीन वर्ष की अतिरिक्त प्रतिनियुक्ति लेने के लिए मंत्री महोदय एवं मंत्रालय के चक्कर काटते हुए देखे गये हैं। अगर इनको प्रतिनियुक्ति नहीं मिलती है तो विकल्प के रूप में म.प्र. योग आयोग के अध्यक्ष पद पर पीठासीन होना चाहते हैं।

केवल यहां तक नहीं राज्य ओपन के संचालक तिवारी ने राज्य ओपन बोर्ड के परीक्षा आवेदन फार्म भरने का टेण्डर प्राईवेट सेक्टर के ‘आईसेक्ट’ को दिया गया है जो कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए ‘आईसेक्ट’ यूनिवर्सिटी के संचालक से साठ-गांठ कर म.प्र.शासन के एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल के साथ-साथ म.प्र.शासन के राजस्व की हानि पहुंचाई जा रही है।

चूंकि प्रभात राज तिवारी द्वारा संस्कृत बोर्ड के 10 हजार वंचित छात्रों को बजबूर कर संस्था संचालकों पर दबाव बनाकर म.प्र. राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड में परीक्षा आवेदन फार्म भरवाने हेतु बाध्य / मजबूर किया जा रहा है क्योंकि प्रभातराज तिवारी द्वारा ‘आईसेक्ट’ युनिवर्सिटी के डायरेक्टर से सांठ-गांठ कर रखी है। आईसेक्ट के सेन्टर प्रदेशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित न होने से दूर दराज के छात्रों को म.प्र.राज्य ओपन बोर्ड के परीक्षा आवेदन फार्म नहीं भर पाते हैं जिनका भविष्य खराब हो रहा है।

उपरोक्त विषयों को लेकर संस्कृत बोर्ड के संस्था संचालकों ने अम्बेडकर पार्क में धरने पर बैठे थे वहां डी.सी.पी. ने आकर संस्था संचालकों को आश्वासन दिया कि हम मंत्री जी के सामने आपकी समस्या रखेंगे एवं आप लोगों की मुलाकात भी करवायेंगे परन्तु शाम के समय मंत्री आवास पर पहुंचे तो मंत्री उपस्थित होने के बावजूद भी संस्था संचालकों से मिलने का समय नहीं दिया और एक हप्ता बाद समाजसेवियों के प्रतिनिधि मंडलों ने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह जी से उक्त विषय में मुलाकत की व चर्चा की उसके बाद मंत्री ने प्रभात राज तिवारी से मिलने के लिए कहा ,जब प्रभातराज तिवारी से मिले तो उन्होंने स्पष्ट रूप से म.प्र.संस्कृत बोर्ड के 10 हजार छात्रों को संस्कृत बोर्ड में प्रवेश न देकर म.प्र.राज्य ओपन बोर्ड में फार्म भरने के कहा गया, क्योंकि राज्य ओपन बोर्ड व आईसेक्ट के साथ इनकी सांठ-गांठ व निजी हित का मामला समझ आता है, यह विषय गंभीर एवं जांच का विषय ह्यो सकता है।

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Author: rastriyajagran

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