कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर में पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ –

कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर में पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ –
कृषको को दी गई देशी बीज संरक्षण एवं उनके पंजीयन की जानकारी –
दिनांक 25.02.2026 को कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर, नर्मदापुरम में “पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास के सदस्य श्री मनोज राय, प्रबंधक श्री धर्मेन्द्र गुर्जर, कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा से प्राध्यापक डॉ. दीपक खांडे, केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संजीव कुमार गर्ग तथा केंद्र के समस्त वैज्ञानिक एवं जिले से पधारे कृषक उपस्थित रहेंI कार्यक्रम के प्रभारी नोडल अधिकारी डॉ. देवीदास पटेल ने कार्यशाला के उद्देश्य एवं रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण के महत्व की विस्तृत जानकारी दी। न्यास के सदस्य श्री मनोज राय ने किसानों को प्राकृतिक खेती में देशी बीजो का महत्त्व पर बल देते हुए कृषकों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी ।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक खांडे ने बीज संरक्षण एवं कृषकों द्वारा विकसित/पहचान की गई किस्मों का पंजीयन पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कैसे कर सकते उसकी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी कृषकों के साथ सांझा की जिससे कृषक अपनी किस्मो को पंजीयन कराकर इस अधिनियम के तहत कृषक अपनी पंजीकृत किस्मो का बीज उत्पादन, विक्रय एवं उसे संरक्षित कर सकते है ।
केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संजीव कुमार गर्ग ने नर्मदापुरम के कृषकों को अपने क्षेत्र में पाई जाने वाली देशी बीजों को अधिनियम के तहत पंजीयन कराकर प्राकृतिक खेती में उपयोग करने की सलाह दी जिससे फसल की लागत कम कर अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सके।
डॉ. देवीदास पटेल द्वारा बताया गया कि हमारे मध्यप्रदेश में बहुत से किसनो ने अपनी किस्मों का पंजीयन कराकर देशी बीजों को संरक्षित किया है और जिसका लाभ कृषक ले रहे है। उन्होंने आगे कहाँ कि देशी किस्मे गुणवत्ता की दृष्टि से उन्नत किस्मो की तुलना में बहुत अच्छी होती है परन्तु इनका उत्पादन उन्नत किस्मो की तुलना में कम होता है। गुणवत्ता अधिक होने के कारण देशी किस्मो की बाजार में अधिक मांग होती है। जिसे किसान बाजार में बेच कर अधिक लाभ प्राप्त कर सकता है, इसके लिए किसानो को देशी बीज संरक्षित कर पंजीयन कराना पडेगा।
कार्यक्रम के दौरान केंद्र में स्थापित देशी बीज संरक्षण एवं विभिन्न किस्मों के बीजों की प्रदर्शनी का अवलोकन अतिथियों एवं कृषकों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में नर्मदापुरम जिले के 106 कृषक एवं महिला कृषकों सहित केंद्र के वैज्ञानिक, सहायक वैज्ञानिक एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहे। अंत में श्री ब्रजेश कुमार नामदेव द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
Rahul Majhi
Author: Rahul Majhi

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